नीरज फोगाट ने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में कांस्य जीत किया पुलवामा के वीर शहीदों को समर्पित

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बुल्गारिया में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सतरंग कप (International Satrang Cup) में चरखी दादरी की बेटी नीरज फोगाट ने मुक्केबाज़ी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कांस्य पदक जीता है। नीरज सेमीफाइल मुक़ाबले में 1 अंक से गोल्ड जीतने से चूक गई। नीरज ने अपना पदक पुलवामा के वीर शहीदों को समर्पित कर श्रद्धांजलि दी है।

 नीरज फोगाट ने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में कांस्य जीत, किया पुलवामा के वीर शहीदों को समर्पित

नीरज फोगाट से संबन्धित कुछ जानकारी –

आपको बता दें की नीरज चरखी दादरी के गांव झिंझर की निवासी है। अपनी कड़ी मेहनत व गांव की मिट्टी पर प्रैक्टिस कर उन्होने यह मुकाम हासिल किया है। उनका सपना ओलंपिक में खेल कर देश के लिए गोल्ड जितना है।

नीरज के ताऊ रमेश पहलवान कहते हैं कि नीरज को बचपन से ही खेलों का शौक रहा है। सुबह उठकर दौड़ लगाना और फिर कुश्ती के दांव-पेंच सिखाए गए थे। बाद में नीरज का मुक्केबाजी में रूझान देखते हुए उसे उसकी बुआ के पास भेजकर अभ्यास करवाया। आज इसी का नतीजा है कि नीरज ने उनका, गांव व क्षेत्र का नाम विदेशों में चमका दिया।

गांव के जोहड़ किनारे अपने भाई के साथ सुबह-शाम कड़ी प्रैक्टिस कर वह इस मुकाम तक पहुंची है। मां बबीता के अनुसार उसने हमेशा नीरज को बेटा मानकर पाल-पोषण किया है। आज मेरी बेटी ने साबित कर दिया है कि बेटियां बेटों से कम नहीं हैं।

आप यह जान लें कि महिला मुक्केबाज (Woman-Boxer) नीरज फोगाट का मशहूर कुश्ती करने वाले ‘फोगाट सिस्टर्स ‘ से कोई भी लेना-देना नहीं है। नीरज मुक्केबाजी की ‘फोगाट’ ब्रांड है जिन्हें आज से कुछ साल पहले शायद ही कोई जानता हो, लेकिन अपने दृढ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ नीरज कम समय और उससे भी कम संसाधनों की बदौलत एक बड़ा मुकाम हासिल किया है।

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