राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में कृमि संक्रमण से मुक्ति अभियान की शुरूआत की।

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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने 8 फरवरी, ‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस’ पर 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों व किशोरों को नि:शुल्क एल्बेंडाजोल गोली खिलाकर राज्य में कृमि संक्रमण से मुक्ति अभियान की शुरूआत की। कृमि संक्रमण से मुक्ति अभियान के तहत प्रदेश के 93 लाख बच्चों को इस गोली का सेवन करवाया जाएगा।

हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजीव अरोड़ा ने विभिन्न स्कूलों के करीब 100 बच्चों को गोली खिलाकर पंचकूला से अभियान शुरू किया।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में कृमि संक्रमण से मुक्ति अभियान की शुरूआत की।

अरोड़ा ने बताया की निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 14 फरवरी को मॉप-अप राऊंड होगा, जिसमें शेष बचे बच्चों को इस गोली का सेवन करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान को पूरा करने के लिए राज्यभर में आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों, गांवों, कस्बों तथा शहरों में अनेक स्थलों पर यह सुविधा प्रदान की गई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर तथा स्कूलों के अध्यापकों का सहयोग लिया जाएगा।

आगे उन्होने कहा कि इस कार्य में जहां विभिन्न संस्थाएं अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं, वहीं अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को यह गोली अवश्य खिलाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की सजगता और मेहनत से राज्य में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर में कमी आई है तथा अन्य पैरामीटर में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने हर स्तर पर प्रयास किए हैं।

कृमि संक्रमण क्या है?

परजीवी कृमि संक्रमण को नेमाटोड संक्रमण (Nematode Infection) भी कहते हैं। ये संक्रमण हैलिमिंथियासिस (Transfusion halimanthiasis) जैसा संक्रमण होता है, जो नेमाटोड फायलम के जीवों द्वारा होता है। नीमाटोड परजीवी होते हैं। परजीवी (पैरासाइट्स) वह कीटाणु है जो व्यक्ति में प्रवेश करके बाहर या भीतर (ऊतकों या इंद्रियों से) जुड़ जाती है और सारे पोषक तत्व को चूस लेती है।

कृमि संक्रमण दुषप्रभाव –

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक श्रीमती अमनीत पी. कुमार ने कहा कि कृमि संक्रमण से बच्चों एवं युवाओं के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव पड़ता है, जिससे पेट दर्द, बुखार तथा एनिमिया तक की समस्या हो जाती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए यह दवाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्य के अनुसार वर्ष 2022 तक देश को अनीमिया तथा कुपोषण मुक्त बनाना है। इसके लिए सरकार हर प्रकार से लक्ष्य प्राप्ति की कौशिश कर रही है।

उन्होने बताया कि गत वर्ष 2018 में सरकार ने 78 लाख बच्चों एवं किशोरों को यह दवाई खिलाई थी, जिसमें राज्य के 25 हजार से अधिक स्कूलों, करीब 25 हजार से आंगनवाड़ी केन्द्रों पर यह दवाई खिलाई गई थी। उन्होंने बताया कि इस बार भी राज्यभर के करीब 50 हजार अधिक शिक्षकों एवं आंगनवाड़ी वर्कर की ड्यूटी लगाई गई है।

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