हरियाणा के प्रसिद्ध साहित्य और साहित्यकार

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हरियाणा साहित्य अकादमी के बारे में –

हरियाणा की प्राचीन सभ्यता व संस्कृति का बड़ी गौरवशाली रही है। हरियाणा को विश्व के पहले गणराज्य की जन्मभूमि होने का गौरव भी प्राप्त है। हरियाणा की साहित्यिक परंपरा सरस्वती नदी के किनारे वेदों की रचना से आरंभ होती है और महर्षि वेद व्यास द्वारा महाभारत की रचना एवं श्रीकृष्ण द्वारा कुरूक्षेत्र में अर्जुन को गीतोपदेश, संत कवि सूरदास, मार्केडय, पं. लखमीचंद, हाली पानीपती, संतोख सिंह, बाबा फरीद के दिखाये मार्ग पर चल कर यहाँ तक पहुंची है। इसी धरा पर वेदों, पुराणों तथा उपनिषदों की रचना हुई।

प्रदेश की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि के लिये हरियाणा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्ग-दर्शन में अकादमी द्वारा साहित्य विकास की विभिन्न योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। जैसे- प्रदेश में उदीयमान लेखकों को प्रोत्साहित करना, प्रतिष्ठित साहित्यकारों का सम्मान करना, लोक साहित्य का संरक्षण करना, श्रेष्ठ कृतियों को पुरस्कृत करना, पुस्तक प्रकाशन के लिये अनुदान उपलब्ध करवाना, साहित्यिक परिवेश की समृद्धि के लिये लेखक गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, कविता गोष्ठियों आदि साहित्यिक आयोजन किये जाते हैं।

प्रदेश में उच्च साहित्यिक प्रतिमान स्थापित करने, विभिन्न भाषाओं की साहित्यिक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने, हरियाणा की सांस्कृतिक व साहित्यिक विरासत में शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार, शिक्षा विभाग की अधिसूचना क्रमांक 9/13/79 शि (1), दिनांक द्वारा 25 जुलाई, 1971 को हरियाणा साहित्य अकादमी का गठन किया गया।

अकादमी का प्रशासनिक नियंत्रण सूचना, जन सम्पर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग को स्थानांतरित होने के परिणामस्वरूप हरियाणा सरकार, सूचना, जन सम्पर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की अधिसूचना क्रमांक 8/38/9-3वीपी सी. दिनांक 26 अगस्त 2011 को अकादमी का पुनर्गठन किया गया।

अपने गठन से लेकर लगभग 38 वर्ष की अल्पावधि में अकादमी द्वारा प्रदेश की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते हुए समकालीन रचनाशीलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में विशेष भूमिका अदा की है। अकादमी द्वारा प्रदेश के 130 वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया है तथा विभिन्न वर्गों के अन्तर्गत 221 श्रेष्ठ कृतियों को पुरस्कृत किया गया है। अकादमी के सौजन्य से अब तक हरियाणा अधिवासी लेखकों की 460 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि जब से माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश की बागडोर संभाली थी तब अकादमी की बजट राशि 45 लाख थी जो आज बढ़ कर 3 करोड़ रुपये हो चुकी है।

हरियाणा साहित्य अकादमी के उद्देश्य और कार्य –

  • हिन्दी तथा हरियाणवी को प्राथमिकता देते हुए भाषाओं व साहित्य को बढ़ावा देने हेतु साहित्यकारों के मध्य सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • हरियाणा राज्य के लोगों में इन भाषाओं इनके साहित्य के अध्ययन व प्रचार को प्रोत्साहित करने हेतु।
  • भारतीय भाषाओं और साहित्य, इतिहास, संस्कृति में हरियाणा के योगदान पर शोध कार्य को बढ़ावा देना।
  • उच्च ऐतिहासिक, कलात्मक व साहित्यिक दृष्टि से मूल्यवान पांडुलिपियों का संरक्षण तथा उनका प्रकाशन करना।
  • हरियाणा के लेखकों की विभिन्न साहित्यिक विधाओं में रचनाओं के संकलन प्रकाशित करना।
  • उच्च साहित्यिक स्तर की रचनाओं का दूसरी भाषाओं में अनुवाद करना। शोध पत्रिका का प्रकाशन करना।
  • भाषा तथा साहित्यकारों से सम्बद्ध मुख्य दिवस/जयंतियॉ मनाना। जीवनी, शब्दकोश, इन्साइक्लोपीडिया, शब्दावलियों का प्रकाशन करना तथा इस कार्य में लगे संगठनों/व्यक्तियों को सहयोग करना।
  • साहित्यिक सम्मेलन, गोष्ठियॉं तथा पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित करना या प्रायोजित करवाना।
  • श्रेष्ठ साहित्यिक कृतियों के लिए पुरस्कार प्रदान करना तथा उल्लेखनीय योगदान के लिए साहित्यकारों का सम्मान करना।
  • लोक साहित्य के संरक्षण व शोध को प्रोत्साहित करना।
  • राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से अचल सम्पत्ति की स्थिति में अकादमी की चल अचल सम्पत्ति जुटाना।
  • अन्य कार्य जो इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये जरूरी हों।

Source – http://haryanasahityaakademi.org

इस पोस्ट में हम हरियाणा के विभिन्न साहित्यकार, साहित्य रचनाओं आदि के बारें में जानेंगे। ऐसी जानकारी प्राय: हरियाणा से संबन्धित विभिन्न एक्जाम में पुछ ली जाती है। हमें उम्मीद है की दी गई जानकारी हरियाणा से संबन्धित विभिन्न एक्जाम जैसे की HSSC, HPSC, Haryana Police, HTET आदि अनेक परीक्षाओं में आपकी मदद करेगी।

हरियाणा के प्रसिद्ध साहित्यकार से संबन्धित जानकारी –

  • गोरखनाथ – हरियाणवी भजनों की रचना की। इनमें रचित पाण्डुलिपि में 49 राग एवं 182 पदों का संकलन है।
  • संत गरीबदास – हरियाणवी भाषा में अनेकों कविताओं की रचना।
  • ताऊ सांगी – 19वीं सदी के प्रमुख हरियाणवी साहित्यकार,‘रुक्मणी- विवाह’ जैसे ग्रन्थों के रचनाकार।
  • सादुल्ला – नूह क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार,‘महाभारत’ प्रसिद्ध रचना है।
  • राजाराम शास्त्री – हरियाणवी के पद्द लिखने को परंपरा को कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
  • बंसीलाल –‘गुरु- गुम्मा’, राजा गोपीचन्द्र’,‘राजा नल’ जैसी हरियाणवी रचनाओं के रचनाकार।
  • गुलाम कादिर – सूफी विचारधारा वाले महान साहित्यकार द्वारा ‘प्रेम- लहर’,‘प्रेमवाणी’,‘प्रेम- प्याला’ व ‘इंतखाब’ आदि की रचना की। इनकी हरियाणवी चौपाई काफी प्रसिद्ध हुई।
  • दयालदास – गरीबदास के अनन्य भक्त द्वारा रचित ‘विचार- प्रकाश’ नामक रचना काफी प्रसिद्ध हुई।
  • हरिदास – हरियाणवी भाषा के प्रसिद्ध कवि तथा ‘राजा- रतनसेन’ जैसे हरियाणवी ग्रंथ के रचनाकार।
  • सत्य नित्यानन्द – ‘सत्य सिद्धान्त प्रकाश’,‘नित्यानन्द के भजन’ व ‘बारहखड़ी’ जैसी हरियाणवी रचई नाएँ।
  • जैतराम – इनके द्वारा 25 पुस्तकों की रचना की गई।
  • अलीबख्श – ‘तमाशा राजा नल’ व ‘कृष्णलीला’ जैसे सांगों के साथ दोहे भजनों की भी काफी रचना की।
  • योगेश्वर बालकराम – ‘पूरण भक्त’,‘रामायण’,‘कुंजड़ी’ व ‘शालादे’ जैसी हरियाणवी रचनाओं के रचनाकार।
  • अहमद बख्श – ‘जयमत फंता’,‘रामायण’,‘गूंगा- चौहान’,‘सौठड’, व ‘पद्मिनी चंद्र्किरण’ प्रमुख हरियाणवी रचनाएँ है।
  • सैयद गुलाम हुसैन शाह – ‘राम- माल’ व ‘दाहिने हाथ का शंख’ इनकी प्रमुख हरियाणवी रचनाएँ हैं।
  • कवि शंकर लाल शुक्ल – इनके द्वारा ‘भक्तमाल’,‘भक्त प्रहलाद्’ आदि सांगों की रचना की गयी।
  • गोवर्धन सारस्वत – ‘कृष्णलीला’,‘महाभारत’,‘जोधपुर नरेश जसवंत सिंह’,‘माधव नल’,‘दुल्ला काम काम कंदला’ आदि हरियाणवी सांगों के रचानाकार।
  • संत हरदेवदास – ये भी हरियाणा के प्रमुख साहित्यकारों में से एक है।
  • कृष्ण गोस्वामी – ‘दिवाकर’,‘गुलाबकावली’ जैसी रचनाओं के रचनाकार।

हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार से संबन्धित जानकारी  –

  • दंत कवि – बारहखड़ी
  • माणिक्य राज – अमरसेन चरित्र
  • नेमीचन्द्र – त्रिलोक दर्पण
  • बालमुकुंद – तारा, तुलसी सुधाकर, अधखिला फूल, अश्रुमती, हिन्दी भाषा, हिन्दी भाषा की भूमिका
  • भगवती – सीतासेतु
  • गुलाब सिंह – भवर सामृत, माक्ष पंथ तथा प्रबोध चंद्रोदय
  • ईशदास – अंगद पैर, भरत मिलाप व सत्यवती कथा
  • संतोष सिंह – रामकोश, श्री गुरुनानक प्रकाश, गरव गजनी, वाल्मीकि रामायण, आत्म पुराण, गुरु प्रताप सूरज
  • सम्राट हर्षवर्धन – प्रियदर्शिका, रत्नावली, नागानन्द
  • गरुडध्वज – धर्मध्वज
  • माधव प्रसाद मिश्र – माधव मिश्र निबंधावली
  • बाणभट्ट – चंडी शतक, पार्वती परिणाम हर्षचरित, कादंबरी
  • रामप्रसाद – स्वदेश दर्शन
  • ब्रजलाल सेंधी – निंबार्क संप्रदाय प्रकाश
  • शंभू दयाल – रुक्मणी मंगल
  • हरद्वारी लाल – सारस्वत
  • रामचन्द्र – कुरुक्षेत्र महात्म्यम्
  • श्रीधर – चंद्रमा, शांतिनाथ, पार्श्वनाथ, वृद्धमान महावीर
  • मनभावन – वृज विनोद
  • ठाकुर फेरु – वस्तुसार तथा रत्न परीक्षा
  • निश्चलदास – विचार सागर, वृत्ति प्रभाकर, युक्ति प्रकाश
  • बूचराम – संतोष जयतिलक, नेभिनाथ वसंतु, नेभिश्वर का बारहभासा, टंडाणा गीत

हरियाणा के सूफी साहित्यकार –

हरियाणा के पहले सूफी संत शेख मुहम्मद तुर्क थे, जिन्होंने हरियाणवी समाज व साहित्य में सूफीवाद का मिठास घोला। राजा राम शास्त्री जी ने ही सूफी संत हजरत खैरुशाह की अनमोल रचना ‘बारहमासा’ की खोज की थी।
सूफी संत शाह गुलाम जिलानी रोहतकी की चौपाईयां अपने समय में काफी प्रसिद्ध हुई थी। ‘अकायदे- आजम’ जो ‘हादी- ए- हरियाणा’ के नाम से प्रसिद्ध शाह मुहम्मद रमजान शहीद की रचना है। इसे हरियाणा गद्द की सभी श्रेष्ठ रचनाओं में से एक माना जाता है। शाह रमजान को ‘हिन्दी- ए- हरियाणा’ के नाम से भी जाना जाता है।

हरियाणा का संस्कृत साहित्य –

  • महर्षि वेदव्यास – महाभारत, गीता, पुराण
  • सत्यमेव वशिष्ठ – भाषयम् , सत्यागृहनीति काव्यम् , विष्णुसहस्रानाम व नाड़ीतत्वदर्शनम्
  • आचार्य भगवान देव – महाभाषायम् , नारायण स्वामिनीचरित्रम् , छन्द शास्त्रम् , काव्यालंकार सूत्रादी , कारिका प्रकाश गुरुकुल श्तकम, दयानंद लहरी, विरजनन्द चरित्रम् , ब्रह्माचर्यामृत्म् व ब्रह्माचार्यशतकम्
  • स्वामी हरिदास – दादुरामोदय
  • पंडित माधवाचार्य शास्त्री – कबीर चरित्रम्
  • पंडित विद्याधर शास्त्री – विवाह पद्धति, वास्तुशांति पद्धति, शिक्षान्यास पद्धति, समार्तप्रभु, उपनयन पद्धति, श्राद्धसार, देवचयाज्ञिक पद्धति, सुलभ सूत्रवृति व कात्यायन श्रोत सूत्रवृति।
  • पंडित हरीपुण्य न्याय रत्न – चित्रबोधिनी
  • पंडित विद्यानिधि – श्री भक्त फूल सिंह चरित्रम् , संक्षिप्ते रामायण महाभारते , महर्षि दयानंद, व्यवहार भानु, ऋग्वेद काव्य तत्वानि व मैत्रीयणीसंहितोक्ता सूक्तिसंग्रह।
  • पंडित जयराम शास्त्री – जवाहर बसंत साम्राज्य।
  • महाकवि मयूर – मयूराष्टक व सूर्यशतक।
  • पंडित छज्जूराम शास्त्री – संस्कृत साहित्य, कुरुक्षेत्राष्टकम, दुर्भाभ्युदयानानाकटम् , सुल्तान चरित्रम्।
  • सीताराम शास्त्री – साहित्यमोपदेशय्।

हरियाणा का जैन साहित्य –

  • भगवती दास – चतुर बंजारा, मनक रहरास, अनेकों अर्थमाला, सीता सुत, जोगीरासा, मधु बिंधक चौपाई, टांडाना रास व मृणांककलेरवा चरित।
  • बनारसी दास – नवरास रचना अर्द्ध कथानक, नाटक समयसार, बानरसी विलास, नामा माला, मोह विवेक युद्ध।
  • पुष्पदंत – कोश ग्रंथ, जसहर चरिउ व तिसट्ठय महापुरिस गुणालंकर।
  • विजयानन्द सूरी – नवतत्व, आत्मबावनी, रत्नावली, जैन तत्वादर्श व अज्ञात तिथि भास्कर।
  • मालदेव – देवदत्त चौपाई, विरांगत चौपाई, भोज प्रबंध, स्थूलभद्र फागु, पुरंदर चौपाई।
  • श्रीधर अपरवाल – पासणाह चरिउ, सुकमाल चरिउ, भंविसयत चरिउ व आमेर शास्त्र भंडार।
  • बूचराज उर्फ बल्ह – फुटकर बसंत, नेमीश्वर बारहमासा, नेमीनाथ वसन्तु, संतोष जयतिलक, चेतन पुद्गल ढाल।
  • जगतराय – सम्यकत्व कौमुदी, आगम विलास व पद्मनंदी पत्र विषन्तिका।
  • रूपचन्द्र पाण्डेय – मंगलगीत, गीत परमार्थी, रूपचन्द्र शतक व परमार्थी शतक।
  • सुंदरदास – सुंदर शृंगार, सुंदर विलास, सुंदर सतसई, पाखंड पचासीका व धर्म सहेली।
  • धर्मपाल – श्र्तु पंचमी रास व आदिनाथ स्तवन।

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