आखिर क्यों दर्शनलाल जैन जी को पद्म पुरस्कार के लिए चुना गया?

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हाल ही में 26 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने 112 पद्म पुरस्कारों के लिए घोषणा की हैं। आपको बता दें की हरियाणा से 5 प्रसिद्ध हस्तियों को पद्म पुरस्कार से नवाजने की घोषणा की है। इन पाँच हस्तियों में शामिल है यमुनानगर के दर्शनलाल जैन, जिनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ हैं। दर्शनलाल जैन जी ने केन्द्र एवं राज्य सरकारों का धन्यावाद करते हुए इसे हरियाणा प्रदेश की सभ्यता और संस्कृति का सम्मान बताया।

आखिर क्यों दर्शनलाल जैन जी को पद्म पुरस्कार के लिए चुना गया?

आखिर क्यों दर्शनलाल जैन जी को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया?

समाज सेवी दर्शनलाल जैन ने सरस्वती नदी की खोज में अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। दर्शनलाल जैन के अथक परिश्रम और निशानदेही पर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कई जगह से सरस्वती नदी की भूमिगत धारा को खोजा जा चुका हैं। उनकी कठिन मेहनत एवं परिश्रम का ही नतीजा है कि उनकी निशान देही पर हरियाणा सरकार ने समय के साथ-साथ लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी की धारा को यमुनानगर के मुगलवली गांव एवं आदिबद्री से खोज निकला। इसलिए भारत सरकार ने उन्हें देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजने का फैसला लिया है।

आखिर क्यों दर्शनलाल जैन जी को पद्म पुरस्कार के लिए चुना गया?

समाजसेवी दर्शनलाल जैन जी को यदि ‘कलयुग के भागीरथ’ की संज्ञा दी जाए तो वो जाया नहीं होगी, क्योंकि जिस प्रकार सतयुग में भागीरथ मुनि ने कठिन तप और परिश्रम करने के बाद गंगा नदी को धरती पर अवतरित किया था। ठीक उसी तर्ज पर आज कलयुग में दर्शनलाल जैन ने भी अपना पूरा जीवन सरस्वती नदी की खोज को समर्पित कर दिया।

दर्शनलाल जैन ने सरस्वती नदी की खोज में तय की गई अपनी लम्बी यात्रा की कुछ महत्वपूर्ण बातों को सांझा करते हुए कहा कि यह राह इतनी आसान नहीं थी। शुरूआती दौर में हर कदम पर उन्हें रूकावटें मिली। जैसे यूपीए-(वन) सरकार ने रामसेतु की तरह भगवान राम और सरस्वती नदी के अस्तित्व को ही मानने से इंकार कर दिया था। और इसे समय, पैसे और उर्जा की बर्बादी करार दिया था। लेकिन यूपीए-(टू) सरकार द्वारा नदी की खोज को स्वीकृति देते हुए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाई। जिसके बाद सरस्वती नदी की खोज का ऐतिहासिक काम शुरू हुआ।

उन्होंने बताया कि सेटेलाइट चित्रों के माध्यम से यह भी पता चल पाया कि हरियाणा की ज्यादातर आबादी भूमिगत हो चुकी सरस्वती नदी के किनारे पर बसी हुई हैं। दर्शनलाल जैन ने एक विशेष बातचीत में बताया कि आज जब कई जगहों से सरस्वती नदी की धारा प्रकट हो चुकी हैं।

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