अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव – 2018

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गीता जयंती श्रीमद् भगवद् गीता का प्रतीकात्मक जन्म है| माना जाता है की इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत का युद्ध होने से पहले गीता का उपदेश दिया था| गीता जयंती को गीता उत्सव, मोक्षदा एकादशी, मत्स्या द्वादशी आदि नाम से भी जाना जाता है|

हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता (Bhagavad Gita) की उत्पत्ति मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने की थी| इस वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी 18 दिसंबर को है| बता दें, श्रीमद्भगवद्गीता में कुल 18 अध्याय हैं, जिनमें 6 अध्याय कर्मयोग, 6 अध्याय ज्ञानयोग और आखिर के 6 अध्याय भक्तियोग पर आधारित हैं| इसी गीता के अध्यायों से ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिए थे|

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गीता की उत्पत्ति के इस दिन को गीता जयंती (Gita Jayanti) के तौर पर मनाया जाता है| गीता जयंती के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जाता है और देशभर में भगवान कृष्ण और गीता की पूजा की जाती है|

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2018 का आयोजन 7 दिसंबर से 23 दिसंबर तक किया जा रहा है| अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2018 में कला, शिल्प, व्यंजन, संस्कृति, इतिहास, धरोहर और आध्यात्मिकता के अनोखे संगम इस मेले में देखने को मिलेंगे|

मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच गुरुवार को कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2018 का आगाज हुआ। इस दौरान ब्रह्मसरोवर श्लोकोंच्चारण से गूंज उठा। मॉरीशस के राष्ट्रपति प्रामाशिव्यम पिल्लै वयापरे, राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ब्रह्मसरोवर के जल का आचमन कर विधिवत रुप से गीता का पूजन कर गीता जयंती महोत्सव का शुभारंभ किया। यह महोत्सव 13 से 18 दिसंबर तक चलेगा।

18 हजार विद्यार्थियों के साथ वैश्विक गीता पाठ, ध्वनि और प्रकाश शो उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला द्वारा 12 से ज्यादा राज्यों के कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार, विराट संत सम्मेलन, ब्रह्मसरोवर की महाआरती, गीता शोभा यात्रा आदि मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहे।

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