इंडिया बुक में दर्ज हुआ रेवाड़ी की सुनीता चौकन का नाम

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वर्ष 2011 में माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) को फ़तह करनें वाली रेवाडी की बहादुर बेटी सुनीता चौकन ने एक नया कारनामा (Exploit) किया है| उन्होने कन्याकुमारी से खारदुंगला तक 5 हज़ार किलामीटर का सफ़र साइकिल से पूरा करके “इंडिया बुक” में अपना नाम दर्ज़ कर जिले और प्रदेश का नाम रौशन किया है|

इंडिया बुक में दर्ज हुआ रेवाड़ी की सुनीता चौकन का नाम

उनकी इस साइकलिंग का उद्देश्य “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ” है।

आपकों बता दें की अपनी यात्रा के दौरान सुनीता 10 हज़ार से ज़्यादा पेड़ लगा चुकी है और हर एक पेड़ की ग्रोथ के लिए 4-4 लोगों को ज़िम्मेदारी दी गई है।

वर्ष 2011 में एवरेस्ट को फ़तह करने के दौरान उन्होंने पहाड़ों के ग्लेशियर को पिघलते हुए देखा। तब उनके मन में एक ख़्याल आया यदि आने वाले समय के लिए इन ग्लेशियरों को नही बचाया गया तो पर्यावरण का अस्तित्व ही ख़त्म हो जाएगा। जिसे लेकर सुनीता ने वर्ष 2017 में कन्याकुमारी से खारदुंगला तक 5 हज़ार किलोमीटर का सफ़र साइकिल से तय किया।

वर्ष 2018 में उन्होने गुजरात के सोमनाथ से पशुपति इंफाल का 5 हज़ार किलोमीटर का सफ़र भी साइकल से तय किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने पर्यावरण को प्लास्टिक पोलिथीन से प्रदूषित होने से बचाने के लिए लोगों से आग्रह किया और प्लास्टिक से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए बताया कि पोलोथिन के तीन बड़े नुकसान होते है। यदि हम पोलोथिन को खुले में फेंकते है तो वह धीरे-धीरे धरती में समा जाती है। जो धरती की उर्वरक शक्ति को ख़त्म कर देती है। सबसे अहम बात प्लास्टिक कैंसर का मुख्य कारण है जो बरसात के दिनों में नदी- नालों के रास्ते समुद्र में पहुंच जाता है। जो वहां माइक्रो प्लास्टिक का रूप धारण कर लेते है। जिन्हें मछलियां खाती है और उन्ही मछलियों के माध्यम से यह मॉइक्रो प्लास्टिक इंसान के शरीर में जाकर कैंसर का कारण बनता है।

सुनीता चौकन अब तक 9 राष्ट्रीय अवार्ड्स हासिल कर चुकी है, जिनमें से नारी शक्ति जोकि राष्ट्रपति द्वारा उन्हें दिए गए है। जिसमें भारत गौरव, डॉटर अवार्ड, कल्पना चावला अवार्ड सहित अन्य अवॉर्ड शामिल है।

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