हरियाणा के एक गाँव में आजादी के 70 साल बाद मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, बेटी ने फहराया तिरंगा

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जहां पूरा देश आज आजादी के जश्म में डूबा है,  लेकिन ये आजादी का जश्न भिवानी के एक शहीद गांव रोहणात के लिए बहुत ही खास है। खास इसलिए क्योंकि आजादी के सत्तर साल दशकों बाद पहली बार गाँव में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र ध्वज फहराया गया है और आजादी के गीत गाए गए हैं।

अब तक इस गांव के लोग अपने आप को आजाद देश में अपने आप को गुलाम समझते थे और इस बार राज्य के मुखिया मनोहरलाल के आश्वासन पर आजादी के जश्न में झुमें हैं।

यहाँ के ग्रामीणों का कहना है कि सीएम के भरोसे पर आज पहली बार गांव के स्कूल में आजादी का जश्न मनाया गया है और उम्मीद है कि उनकी मांग सीएम व सरकार जल्द पूरी करेंगें।

हरियाणा के एक ऐसा गाँव जहां आजादी के 70 साल बाद मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, बेटी ने फहराया तिरंगा

गांव रोहनात में पहली बार जश्न-ए-आजादी पर गांव की सबसे पढी लिखी बेटी अनामिका ने झंडा फहराया। अनामीका M. Tech कर चैन्नई में Income Tax Assistance की पोस्ट पर कार्यरत है।

अनामीका ने बताया कि पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराया जाता था तो वो केवल टीवी या अखबार में ही जश्न की तस्वीरें देख पाती थी। अनामीका ने कहा कि आज अपने गांव में ये जश्न और खुद राष्ट्रीय ध्वज फहराने का गौरव पाकर बहुत खुशी मिली। वहीं अन्य बच्चे की भी यही कहानी है। बच्चों ने अपने गांव में आजादी का जश्न पहली बार होता देख खुशी जाहिर की।

आखिर क्यों रोहनात के लोग अपने आप को अब तक गुलाम समझते थे –

बता दें कि देश को आजादी के लिए पहली बङी लङाई 1857 में लङी गई। इसे 1857 की क्रांति का नाम दिया गया। पूरे देश के लोगों के साथ इस क्रांति में भिवानी जिला के रोहणात गांव के लोगों का भी अहम योगदान रहा। यहां के लोगों द्वारा आजादी की जंग में कुदने से अंग्रेज इतने आगबबुला हुए कि उन्होने रोहणात गांव के लोगों पर एक-एक कर जुल्म करने शुरु कर दिए।

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अंग्रेजों ने रोहणात गांव के लोगों को पेङों पर फांसी पर लटका दिया। पास के गांव मंगल पुठी खां में तोप लगा कर लोगों को उङा दिया गया। यही नहीं कई लोगों को तो हांसी जाने वाली सङक पर लेटा कर उनके उपर बुलडोजर चला दिया। जिसके बाद इस सङक का नाम लाल सङक पङा है।

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अंग्रेजों के जुल्म यहीं नहीं रुके। उन्होने यहां के अधिकतर लोगों को जिंदा मार डाला और गांव की जमीन को नीलाम कर दिया। कुछ सालों बाद एक-एक कर आसपास के लोगों ने निलामी में इस जमीन को खरीद लिया। जिसके बाद यहां के स्थाई निवासी जमीन व कामधंधे से भी वंचित हो गए। हद तब हुई जब करीब 90 साल बाद देश आजाद हुआ। इस गांव के लोगों को धीरे-धीरे लगने लगा कि उनके बुजुर्गों की आजादी के लिए दी गई शहादत बेकार गई क्योंकि उन्हे आजादी के बाद भी अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं मिली। इसको लेकर इस गांव में आजादी के बाद कभी भी राष्ट्र ध्वज नहीं फहराया गया। ये लोग आज 70 से भी अधिक सालों तक अपने आप को आजाद देश का गुलाम समझते रहे।

खुद सीएम मनोहरलाल ने मामले को संज्ञान में लिया और गांव के लोगों से मिले। ग्रामीणों का कहना है कि उनसे मिलकर और गांव के इतिहास को सुनकर खुद सीएम मनोहरलाल भी हैरान रह गए। ग्रामीण कहते हैं कि इसके बाद सीएम मनोहर लाल ने उनकी समस्या के समाधान का भरोसा दिया। साथ ही खुद सीएम मनोहरलाल ने 23 मार्च को गांव में आए और राष्ट्र ध्वज फहरा कर हमें आजादी का अहसास करवाया। साथ ही सीएम ने भरोसा दिलाया कि उनके गांव के लोगों की शहादत हमेशा याद रखी जाएगी और उनकी जमीन कानूनी तरीके से उन्हे दिलाई जाएगी।

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