कैथल के बारें में विस्तृत जानकारी

0
268

कैथल हरियाणा राज्य का एक महाभारत कालीन एतिहासिक शहर है| कैथल हरियाणा के उत्तर में स्थित है| आधुनिक कैथल पहले करनाल जिले का भाग था, और यह करनाल की एक तहसील थी| लेकिन 1973 ई. में यह कुरूक्षेत्र में चला गया। बाद में हरियाणा सरकार ने इसे कुरूक्षेत्र से अलग कर 1 नवम्बर 1989 ई. को स्वतंत्र जिला घोषित कर दिया। कैथल जिला अंबाला मण्डल का हिस्सा है | इसकी सीमा करनाल, कुरुक्षेत्र, जीन्द और पंजाब के पटियाला जिले से मिली हुई है। इसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है|

कैथल के बारें में विस्तृत जानकारी

क्षेत्रफल 2471 वर्ग किमी
स्थिति कैथल हरियाणा के उत्तर-मध्य में स्थित है|
स्थापना 1 नवंबर 1989
घनत्व 464 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
मुख्यालय कैथल
जनसंख्या 1074304
लिंग अनुपात 1000 : 881
विकास दर 13.55%
साक्षारता 69.15%
प्रमुख बोली जाने वाली भाषाए हिंदी, हरियाणवी
तहसीले कैथल, गुहला, कलायत, फ़तेहपुर-पुंडरी
खंड गुहल-चीका, कैथल, पुंडरी, कालायत, राजौन्द, सीवन
उपमंडल
उपतहसील राजौन्द, ढाण्ड, सीवन
प्रमुख फसलें गेंहू, चावल की प्रधानता, अन्य – तिलहन, गन्ना, कपास
प्रमुख उद्योग हथकरधा बुनाई, चीनी और कृषि उपकरण
प्रमुख नदी घगर
लोकसभा क्षेत्र कुरुक्षेत्र
विधानसभा क्षेत्र कैथल, पुंदरी, कालायत, गुहला
पर्यटन स्थल ऋगवेद मनुसा, 7 मनसा तीर्थ, अपाया तीर्थ- गदली, केदारा तीर्थ, ब्राहम्णाकलीना परिसराका – सराका तीर्थ – शेरगढ़, इलस्पदा, देवी तीर्थ कलासी, अमवजन्म तीर्थ, पुण्डरीका तीर्थ, त्रिविस्तिपा तीर्थ, मिश्रका तीर्थ, देवीतीर्थ मोहना, व्ययसाली- बस्थली, रसमंगल तीर्थ, वामन तीर्थ, कोटीकुटा तीर्थ, नैमिसकुंज तीर्थ, ब्रम्हा तीर्थ, सोम तीर्थ, गंधर्व तीर्थ, ज्ञणमोचन तीर्थ, अलकप्का तीर्थ, कुलोररना तीर्थ, पवनरीदा तीर्थ, कुलोरतना तीर्थ आदि

इतिहास –

महाकाव्य महाभारत के अनुसार कैथल की स्थापना महाभारत में वर्णित पांडव राजा युधिष्ठर ने की थी। कैथल को वानर राज हनुमान की जन्म स्थली भी माना जाता है। इसीलिए पहले इसे कपिल स्थल के नाम से जाना जाता था। इस कारण से इस नगर का प्राचीन नाम कपिस्थल पड़ा, जो कालांतर में कैथल हो गया| वैदिक सभ्यता के समय में कपिस्थल कुरू साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था जैसा कि मानचित्र में देखा जा सकता है। कैथल का नाम यजुर्वेद संहिता के रचयिता कपिल ऋषि के नाम पर भी पड़ा हो सकता है |

कैथल के बारें में विस्तृत जानकारी

कुछ समय पश्चात कैथल मुस्लिम संस्कृति का केंद्र बन गया। कैथल शब्द का उल्लेख प्राचीन इतिहास में मिलता है। यहाँ के पुराने ऐतिहासिक स्थल, धार्मिक स्थान और जगह-जगह सदियों पूर्व बने भवनों के खण्डहर, अतीत की महत्त्वपूर्ण यादें संजोए हुए हैं।

कैथल एतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है| यहाँ ऐतिहासिक महत्त्व की वस्तुओं में एक विशाल स्नान जलाशय और 13वीं शताब्दी के कई पीरों की मज़ारें भी देखने को मिलती हैं। इतिहास के अनुसार यह भारत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान (इल्तुतमिश की पुत्री) के साम्राज्य का एक भाग था। 13 नवंबर 1240 को रजिया यहीं मृत्यु को प्राप्त हुई। दिल्ली में विद्रोह के बाद रजिया सुल्तान को वहाँ से भागना पड़ा। कैथल में दिल्ली की व्रिदोही सेनाओं ने उसे पकड़ लिया और एक भयंकर युद्ध में रजिया सुल्तान को मार दिया गया। इतिहास की एक अन्य मान्यता के अनुसार यहाँ के स्थानीय लोगों ने ही रज़िया को पकड़ कर उसे मार डाला था। और उन्हे यहीं दफना दिया गया और आज भी उसकी कब्र यहाँ मौजूद है। रजिया सुल्तान के अलावा इस पर सिक्ख शासकों का शासन भी रहा है।

[ads2]

सन 1398 में कैथल के जाटों (सिक्ख) ने तैमूर लंग का जबरदस्त विरोध किया था | मध्यकाल में मंढार राजपूत मोहनसिंह इसका जागीरदार था | अकबर के शासनकाल से पहले ही यहाँ ईंटों से निर्मित एक किला मौजूद था |

रजिया सुल्तान के अलावा इस पर सिक्ख शासकों का शासन भी रहा है। सिक्ख गुरु रामदास भी यहाँ पधारे थे | जब बख्श खाँ और निहम्मत खाँ इसके जागीरदार थे तो बिडारवंशी जाट सिक्ख देस्सूसिंह ने अन्य सिक्खो की मदद से यह जागीर उससे छीन ली और इसे रियासत बना लिया | यहाँ के शासक देसू सिंह को सिख गुरु हरराय जी ने सम्मानित किया था जिसके बाद यहाँ के शासकों को “भाई” की उपाधि से संबोधित किया जाने लगा। देस्सूसिंह ने सन 1762 इसवीं में अहमदशाह दुर्रानी के खिलाफ बरनाला में लड़ाई लड़ी | सन 1781 इसवीं में देस्सू सिंह की मृत्यु के बाद उसका बड़ा पुत्र बहलसिंह और उसके बाद छोटा पुत्र भाई लाल सिंह मुखिया बना | उसके बाद प्रताप सिंह (मृत्यु सन 1823) का शासन रहा | सन् 1843 तक कैथल पर भाई उदय सिंह का शासन रहा जो कि यहाँ के आंतिम शासक साबित हुए। 14 मार्च 1843 को उनकी मृत्यु हुई।

10 अप्रैल 1843 को अंग्रेजों ने यहाँ पर हमला कर दिया। भाई उदय सिंह की माता साहब कौर तथा उनकी विधवा पत्नी सूरज कौर ने वीर योद्धा टेक सिंह के साथ अंग्रेजों से संघर्ष किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। किन्तु 5 दिन के पश्चात् पटियाला के महाराजा ने अपना समर्थन वापिस ले लिया औेर 15 अप्रैल 1843 को कैथल ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया। टेक सिंह को काले पानी की सज़ा सुनाई गई।

कैथल हरियाणा के उत्तर-मध्य में स्थित है | आधुनिक कैथल पहले करनाल जिले का भाग था, और यह करनाल की एक तहसील थी| वर्ष 1973 में जब कुरुक्षेत्र जिले को अलग जिले का दर्जा दिया गया तो कैथल क्षेत्र कुरुक्षेत्र में आ गया था | बाद में हरियाणा सरकार ने इसे कुरूक्षेत्र से अलग कर 1 नवम्बर 1989 ई. को स्वतंत्र जिला घोषित कर दिया। राजौन्द इसके दक्षिण- पूर्व में स्थित है | इसमें कैथल तथा गुहला नामक दो तहसीलें हैं तथा कैथल, पुडरी, चीका व कलायत कस्बे है | इससे पूर्व यह करनाल जिले और फिर कुरुक्षेत्र जिले का उपमंडल भी रहा | राज्य के गठन के समय कैथल एक तहसील थी | यह तहसील भी जिला करनाल के अंतर्गत थी |

कृषि और खनिज –

कैथल में विशेषकर गेंहू और चावल की ज्यादा पैदावार होती है| इसके अलावा तिलहन, गन्ना, कपास आदि भी काफी मात्रा में उगाये जाते है| इसके पास से घघर नदी गुजरती है जिससे यहाँ सिंचाई की व्यव्स्थ्ता अच्छी है| इसके अलावा यहाँ सिंचाई के लिए ट्यूबवल आदि द्वारा भी काफी भाग में सिंचाई की जाती है|

उद्योग और अर्थव्यवस्था –

कैथल में विशेषकर गेंहू और चावल की ज्यादा पैदावार होती है| इसके अलावा तिलहन, गन्ना, कपास आदि भी काफी मात्रा में उगाये जाते है| राज्य को ज़्यादातर आय गेंहू और चावल से प्राप्त होती है| कैथल में हथकरघा बुनाई, चीनी और कृषि उपकरणों का निर्माण करने के उद्योग शामिल है।

शिक्षण संस्थान –

राधा कृष्ण सनातन धर्म कॉलेज कैथल का सबसे पुराना कॉलेज है| जो सन 1954 में स्थापित हुआ था | इसके अलावा यहाँ की राष्ट्रीय विद्या समिति ने 1970 में महिलाओं के लिए इन्दिरा गांधी महिला महाविध्यालय की नीव रखी|

कैथल में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय हैं। जिनमें हरियाणा कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी ऐंड मैनेजमेंट (Haryana College of Technology and Management) और आर.के.एस. डी. कॉलेज (RKSD Collage) शामिल हैं।

[ads1]

यातायात व्यवस्थ्ता –

रेल मार्ग –

रेलमार्ग से कैथल पहुंचने के लिए यात्रियों को पहले कुरूक्षेत्र (दिल्ली – अंबाला मार्ग) या नरवाना (दिल्ली – जाखल मार्ग) आना पड़ता है। कुरूक्षेत्र से नरवाना रेलमार्ग से कैथल रेलवे स्टेशन तक पहुंचा जा सकता है|

सड़क मार्ग –

दिल्ली से पर्यटक कार, बस और टैक्सी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 1 द्वारा करनाल तक आ सकते है, उसके बाद यात्रियों को कैथल तक पहुंच सकते हैं। चण्डीगढ़ से राष्ट्रीय राजमार्ग 65 से सीधा कैथल तक पहुंच सकते हैं। पंजाब से संगरुर व पटियाला से भी सड़क मार्ग द्वारा कैथल तक आ सकते हैं।

अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैथल-राजगढ़ हाईवे के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया जो कि 166 किलोमीटर लंबा है यह कलायत, नरवाना, बरवाला, हिसार और सिवानी से गुज़रने वाले इस हाईवे में 23 अंडरपास और लगभग 21 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड है|

पर्यटन स्थल –

कैथल का ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्व है| कैथल पर्यटन का आकर्षक स्थल है। पर्यटक कैथल में ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़े अवशेष भी देख सकते हैं। इसके अलावा वह यहाँ पर हनुमान की माता अंजनी का मन्दिर भी देख सकते हैं। कैथल में कई दर्शनीय स्थल हैं। यहाँ पर फरल गाँव में फल्गु का मेला लगता है जो काफी प्रसिद्ध है| इसे छोटी कांशी के नाम से भी जाना जाता है|

कैथल के बारें में विस्तृत जानकारी

  • फल्गु मेला – कैथल के फरल गाँव में फल्गु का मेला लगता है | गुहला चीका में बाबा मीरा नव बहार की मजार पर प्रतिवर्ष यह मेला कैथल के बारें में विस्तृत जानकारीआयोजित होता है | कैथल-करनाल मार्ग पर स्थित मुंदडी गाँव में लव-कुश महतीर्थ के कारण भी कैथल की अलग पहचान है |
  • अंजनी का टीला – कैथल को हनुमान का जन्मस्थल माना जाता है। हनुमान की माता अंजनी को समर्पित अंजनी का टीला यहाँ के दर्शनीय स्थानों में से एक है।
  • रज़िया सुल्तान का मकबरा – कैथल नगर के निकट पश्चिम दिशा में संगरूर रोड पर भारत की पहली साम्राज्ञी रज़िया सुल्तान का मकबरा है | रज़िया और उसके पति का कत्ल, उसी के सरदारों द्वारा कैथल के निकट कर दिया गया था |
  • नवग्रह कुंड कैथल के पुरातन तीर्थों में नवग्रह कुंडों का विशेष महत्व है | महाभारत के समय भगवान कृष्ण ने अभ्युत्थान हेतु नवग्रह यज्ञ का अनुष्ठान धर्मराज युधिष्ठिर के हाथों करवाकर नवग्रह कुंडों (सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, मंगल कुंड, बुद्ध कुंड, बृहस्पति कुंड, शुक्र कुंड, शनि कुंड, राहु कुंड और केतू कुंड) का निर्माण करवाया था | इन कुंडों में स्नान के महत्व के कारण कैथल को छोटी काशी भी कहा गया है |
  • ग्यारह रुद्री शिव मंदिर इस मंदिर में महाभारत काल में अर्जुन ने शिव को प्रसन्न कर उनसे पाशुपत अस्त्र प्राप्त किया था | इस मंदिर के वर्तमान भवनों का लगभग अढ़ाई सौ वर्ष पहले तत्कालीन शासक उदयसिंह की पत्नी ने करवाया था |कैथल के बारें में विस्तृत जानकारी
  • अंबकेशवर महादेव मंदिर कैथल में स्थित ‘अंबकेश्वर महादेव मंदिर’ की गिनती अतिप्राचीन मंदिरों में की जाती है | यहा स्थित शिवलिंग को पातालेश्वर और स्वयंलिंग भी कहा जात है |
  • मीरा नौबहार पीर की मजार, गुहला चीका – गुहला चीका बाबा मीरा नौबहार पीर की मजार 960 वर्ष पुरानी बताई जाती है | बाबा मीरा के आठ भाई थे, जिनमे बाबा मीरा सबसे बड़े थे, जिस कारण इन्हे बड़ा पीर कहा जाता है |
  • पुंडरी इसका नाम पुंडरीक ऋषि के नाम पर पड़ा , जिनकी यह तपस्थली मानी जाती है |
  • पुंडरीक सरोवर – पुंडरीक तीर्थ के पावन तट पर नवीकृत नवग्रह कुंड का निर्माण करवाकर 28 मई 1987 को इसे जनता को समर्पित कर दिया |
  • गीता मंदिर पुंडरीक तीर्थ पर जाते समय मरदाने घाट के साथ बने विशाल चबूतरे के पास ही यह विशाल गीता मंदिर है |
  • बिदक्यार (वृद्ध केदार) झील – वामन पुराण में वर्णित वृद्ध केदार तीर्थ को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। कालांतर में इसका नाम बिगड़कर बिदक्यार हो गया है। कई वर्षों तक उपेक्षित पड़ी रही इस झील को आजकल एक सुंदर रूप प्रदान करके एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। झील की सैर करना पर्यटकों को बहुत पसंद आता है क्योंकि वह यहां पर शानदार पिकनिक मना सकते हैं।

इसके अलावा अन्य पर्यटन स्थल इस प्रकार से है – ऋगवेद मनुसा, 7 मनसा तीर्थ, अपाया तीर्थ- गदली, केदारा तीर्थ, ब्राहम्णाकलीना परिसराका – सराका तीर्थ – शेरगढ़, इलस्पदा, देवी तीर्थ कलासी, अमवजन्म तीर्थ, पुण्डरीका तीर्थ, त्रिविस्तिपा तीर्थ, मिश्रका तीर्थ, देवीतीर्थ मोहना, व्ययसाली- बस्थली, रसमंगल तीर्थ, वामन तीर्थ, कोटीकुटा तीर्थ, नैमिसकुंज तीर्थ, ब्रम्हा तीर्थ, सोम तीर्थ, गंधर्व तीर्थ, ज्ञणमोचन तीर्थ, अलकप्का तीर्थ, कुलोररना तीर्थ, पवनरीदा तीर्थ, कुलोरतना तीर्थ आदि|

Official Website Of Kaithal – https://kaithal.gov.in

[toggle title=”Other District of Haryana” state=”open”]

फ़रीदाबाद के बारें में विस्तृत जानकारी

पानीपत के बारें में विस्तृत जानकारी

फ़तेहाबाद के बारें में विस्तृत जानकारी

भिवानी के बारें में विस्तृत जानकारी

अंबाला के बारें में विस्तृत जानकारी

[/toggle]

अगर दी गई जानकारी में कोई त्रुटि है तो हमें तुरंत कमेंट में बताए और उसे सही करने में हमारी मदद करें|

Leave a Reply