हरियाणा की वेश-भूषा और पहनावा

0
1217

इस पोस्ट में प्राचीन हरियाणा के लोगो की वेश-भूषा और पहनावे से संबन्धित जानकारी दी गई है| प्राचीन समय में हरियाणा के लोगो का पहनावा और रहन-सहन बहुत सीधा-साधा और देशी था| हरियाणा के लोगो का पहनावा बहुत ही मनमोहक था| आज के आधुनिक युग में लोगो का पहनावा बहुत हद तक बदल गया है| आपको शायद ही कुछ ऐसे स्थान मिलेंगे जहां आपको हरियाणा के प्राचीन वेश-भूषा के दर्शन हो|

हरियाणा के पहनावे और वेश-भूषा से संबन्धित प्रश्न हरियाणा से संबन्धित प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते है | हमें उम्मीद है दी गई जानकारी ऊमीद्वार की मदद करने में आपकी सहायता करेगी |हरियाणा की वेश-भूषा और पहनावा

हरियाणा राज्य में महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली वेश-भूषा –

  • दामण: काले या लाल सूती कपड़े का घाघरा
  • बोरडा: खद्दर का फूल छपा घाघरा
  • लैह: नीले कपड़े पर पीले पात की कढ़ाई वाला घाघरा
  • खारा: नीले व लाल धागों से निर्मित बिना काली का घाघरा
  • कैरी: नीले व लाल धागों से निर्मित बिना कली का घाघरा
  • चांदतारा: चाँद व तारे की छपाई वाला घाघरा
  • समीज: कमीज के नीचे पहने जाने वाला पहनावा
  • कमीज: कालरयुक्त कमीज
  • जम्फर: आज का लोकप्रिय पहनावा
  • सलवार: आज की पीढ़ी का लोकप्रिय पहनावा
  • ओढ़ना: घोटा लगी ओढनी
  • छयामा: पीले पाट की ओढनी
  • सोपली: गहरे लाल रंग की किनारों वाली ओढनी
  • कमरी: आधी आस्तीनों वाला पहनावा, इसे पहले विवाहित महिलाएं ही पहनती थी |
  • पीलिया: लाल किनारों के बीच पीले की बंधी रंगाई वाला ओढ़ना, यह बच्चा होने पर पीहर से आता है |
  • चुंदड़ी: रंग- बिरंगी ओढनी, महिलाओं के सम्मान का प्रतीक
  • झुगला: छोटे बच्चों का पहनावा, महिलाएं उपहार स्वरूप इसका प्रयोग करती है
    हरियाणा की वेश-भूषा और पहनावा

हरियाणा राज्य में पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली वेश-भूषा –

  • साफा: सैनिक रूप वाली पगड़ी
  • खंडवा: पगड़ी
  • पागड़ी: मारवाड़ी पगड़ी
  • पाग: राजपूती रूप में बड़ी पगड़ी
  • लोई: चादर (ओढ़ने की)
  • खेस: गर्म कंबल (ओढ़ने का)
  • दोहर: सूट की मजबूत व गर्म चादर
  • कमरी: पुराने लोगों द्वारा पहनी जाने वाली आस्तीन (कमर तक)
  • अंगरखा: कलीदार अथवा दरबारी ढंग का पहनावा

हरियाणा राज्य में पहने जाने वाले आभूषण – 

  • गले में पहने जाने वाले आभूषण: इनमे हंसली, हंसला, माला, हार, गुलबंद, जंजीर, कंठी व गलश्री जैसे आभूषण प्रमुख हैं | सोने की गिन्नियों से बना झालरा इसमे विशेष रूप से उल्लेखनीय है |
  • हाथ में पहने जाने वाले आभूषण: चूड़ियाँ, अंगूठी, आरसी, पोहची, बाजूबंद, कड़ीनेवरी, हथफूल, कंडुला, छन्न व टाडिया आदि आभूषण प्रमुख है |
  • चेहरे व सिर पर पहने जाने वाले आभूषण: फूल, कांटा, नथनी, लौंग, सिंगार-पट्टी, ताग्गा, बोरला, टीका, बाली, गजरा, बेस्सर, क्ल्लफ, बूजनी, छाज, पुरली, व कोका आदि जैसे आभूषण प्रमुख है |
  • पांव में पहने जाने वाले आभूषण: कड़ी, झांझण-चूड़ियाँ, पाजेब, पाती, ताती, छैल कड़े, गजरिया, बाकड़े आदि आभूषण प्रमुख है |
  • नाक में पहने जाने वाले आभूषण: लौंग, पुरली, नथ
  • कानों में पहने जाने वाले आभूषण: डांडे, बाली, कर्णफूल, ढेड़े
  • माथे पर पहने जाने वाले आभूषण: छाज, टीका, बोरला, ताग्गा, बेस्सर
  • सिर पर पहने जाने वाले आभूषण: फल, सिंगार- पट्टी, क्लफ
  • पुरुषों के पारंपरिक आभूषण: गोफ व कठला (गले का) तथा मुरकी (कानों का) पतरी (गले की)
  • कमर पर पहने जाने वाला आभूषण: तागड़ी (महिलाओं द्वारा), नाड़ा (जो घाघरे के नाड़े के साथ बांधा जाता है |
  • पल्लू वाला आभूषण: यह आभूषण महिलाओं के ओढ़ने पल्ले में बांधा जाता है |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here