पानीपत के बारें में विस्तृत जानकारी

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­पानीपत, हरियाणा राज्य (Haryana State) का प्राचीन और ऐतिहासिक शहर है। यह “बुनकरों के शहर” नाम से प्रसिद्ध है|  महाभारत काल से भी पानीपत का संबंध रहा है, इसके साथ साथ भारतीय इतिहास की तीन प्रसिद्ध लड़ाइयाँ यहाँ लड़ी गई है |

1 जनवरी 1989 को पानीपत हरियाणा का नया जिला बना, लेकिन 24 जुलाई 1991 को इसे पुन: करनाल में मिला दिया गया | 1 जनवरी 1992 को पानीपत को दौबारा जिला बना दिया गया |

पानीपत के बारें में विस्तृत जानकारी
img src- mapsofindia

पानीपत का कुल क्षेत्रफल 1268 वर्ग किलोमीटर है |पानीपत हरियाणा के मध्य-पूर्व में स्थित है इसके पूर्व में उत्तर-प्रदेश (राज्य), उत्तर में करनाल, पश्चिम में जींद व दक्षिण में सोनीपत जिला स्थित है | यह दिल्ली-चंडीगढ राष्ट्रीय राजमार्ग 1 (NH-1) पर स्थित है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), दिल्ली के अन्तर्गत आता है और दिल्ली से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

भारत के इतिहास में पानीपत, हैंडलूम उद्योग में विश्व मानचित्र पर नाम कमाने में महत्वपूर्ण स्थान रखता है | Click Here to Goto Panipat Website 

क्षेत्रफल 1268 वर्ग किलोमीटर
स्थिति 29.39°N 76.97°E
स्थापना 1 जनवरी 1989, 24 जुलाई 1991 को इसे पुन: करनाल में शामिल किया गया, तत्पश्चात – 1 जनवरी 1992 को दौबारा जिले के रूप में घोषित हुआ |
घनत्व 951 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
मुख्यालय पानीपत
जनसंख्या 442277 (2011), 237,006 (पुरुष), 205271 (स्त्री)
लिंग अनुपात 864
विकास दर 24.60%
साक्षारता 75.94%
प्रमुख बोली जाने वाली भाषाए हिन्दी, ब्रज भाषा सहित हरियाणवी
तहसीले पानीपत, समालखा, बापौली, इसराना
खंड पानीपत, इसराना, मड़लौढ़ा, समालखा, सनौली, बापौली
उपमंडल पानीपत व समालखा
उपतहसील मड़लौढ़ा
प्रमुख फसलें गेहूं व चावल, गन्ना और सब्जियाँ
प्रमुख उद्योग textiles and carpets
प्रमुख नदी यमुना, जिले के पूर्व में बहती है
लोकसभा क्षेत्र करनाल
विधानसभा क्षेत्र पानीपत ग्रामीण, पानीपत शहर, इसराना, समालखा

 

इतिहास –

महाभारत काल में पांडवों एवं कौरवों के बीच का युद्ध इसी के पास कुरुक्षेत्र में हुआ था,  अत: इसका धार्मिक महत्व भी है। महाभारत के युद्ध में युधिष्ठिर ने दुर्योधन से जो पाँच स्थान माँगे थे उनमें ‘पनप्रस्थ’ भी शामिल था | बाद में इसको पानीपत के नाम से जाना जाने लगा |

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आधुनिक युग में यहाँ भारतीय इतिहास के तीन प्रसिद्ध युद्ध भी हुए हैं। पानीपत की जिन तीन लड़ाइयों का एतिहासिक महत्व है , वे है- सन 1526 में इब्राहिम लोदी और बाबर की लड़ाई जिसके परिणामस्वरूप भारत में मुगल साम्राज्य की नीव पड़ी ,सन 1556 एमईआईएन अकबर और रेवाड़ी के हेमचन्द्र के मध्य हुई लड़ाई जिसके फलस्वरूप मुगल साम्राज्य की नीव में दृढ़ता आई और तीसरी लड़ाई सन 1761 में अहमद शाह अब्दाली और सरदार सदाशिव राव भाऊ के मध्य हुई ,जिसमे मराठों की करारी हार ने भारत में ब्रिटिश राज्य की नीव को मजबूत किया | यहाँ अलाउद्दीन द्वारा बनवाया एक मकबरा भी है।

सूफी कवि मोहम्मद अफजल (मृत्यु 1623) और उर्दू के प्रसिद्ध शायर अल्ताफ हुसैन हाली यहीं जन्मे थे | संत बू- अली शाह कलंदर (सन 1224-1345) भी पानीपत में ही पैदा हुए थे | पानीपत के क्रांतिकारी मौलवी कलंदर  ने सन 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का झण्डा बुलंद किया और फांसी पर चढ़े |

कृषि और सिचाई –
पानीपत में मुख्य रूप से गेहूं और गन्ना की खेती की जाती है, पानीपत के पूर्व में यमुना नदी बहती है जिससे यहां कृषि की पैदावार बहुत अच्छी है| यहां सब्जियों को भी काफी बड़े क्षेत्र में पैदा किया जाता है| यहां फूलों की खेती भी की जाती है| गुलाब के फूलों के उत्पादन में पानीपत मुख्य स्थान पर है |

उद्योग-
पानीपत को ‘बुनकरो की नगरी’ भी कहा जाता है | पानीपत में वस्त्र और कालीन बनाने के उद्योग है| यह भारत में अच्छे गुणवत्ता वाले कंबल और कालीनों का केंद्र है, भारतीय फौज के लिए बनाए जाने वाले कंबल भी पानीपत में बनते है | इसके अलावा पानीपत में ‘शुदा यार्न’ का बहुत बड़ा केंद्र है| समालखा जो की पानीपत का एक उपमंडल है, कृषि उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है |

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पानीपत में रिफ़ाइनरी, नेशनल फर्टिलाइजर्स और थर्मल पावर स्टेशन है जो पानीपत के विकास को दर्शाती है | जिस तरह से पानीपत का विकास हो रहा है और यहा रोजगार के साधन असीमित होने के कारण हरियाणा से ही नहीं बल्कि भारत के विभिन्न स्थानों से व्यापारी और इंजीनियर्स, बुनकर यहां काम करते है |

शिक्षा –
पानीपत एक शिक्षित शहर है, पानीपत की साक्षारता दर 75.94% है | पानीपत एक उद्योग नगरी है इस लिए यहा शिक्षा का क्षेत्र काफी विस्तृत है| पानीपत के विभिन्न शिक्षण संस्थान इस प्रकार से है –पानीपत के बारें में विस्तृत जानकारी
सामान्य महाविद्यालय ( General Universities)

  • एस डी कालेज, पानीपत
  • आई बी कालेज, पानीपत
  • आर्ये कालेज, पानीपत

अभियांत्रिकी संस्थान (Engineering Institute)

  • पानीपत इंस्टीट्यूट आफ़ टेक्सटाईल एंड इंजिनयरिंग, समालखा
  • एशिया पैसिफ़िक इंस्टीट्यूट आफ़ इन्फ़ार्मेशन टेक्नालजी, पानीपत
  • एन सी कालेज आफ़ इंजिनयरिंग, इसराना

प्रसिद्ध स्कूल (Famous School)

  • एमएएसडी पब्लिक स्कूल
  • बाल विकास विद्यालय, माडल टाऊन
  • केन्द्रीय विद्यालय, एनएफ़एल – now closed
  • डाक्टर एम के के आर्ये माडल स्कूल
  • एस डी विद्या मंदिर, हूड्डा
  • डी ए वी स्कूल, थर्मल
  • सेंट मेरी स्कूल
  • एस डी सीनीयर सेकेंडरी स्कूल
  • आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल
  • आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल
  • एस डी माडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल
  • एस डी बालिका विद्यालय
  • राणा पब्लिक स्कूल (शिव नगर)

इसके अलावा यहां गरीब बच्चो को शिक्षित बनाने और उन्हे रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न संस्थाओ द्वारा एडुकेशन सोसाईटी का निर्माण किया गया है जो गरीब बच्चों को नि: शुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाते है |

  • श्री सोम सन्तोश एजुकेशनल सोसाइटी, पानीपत
    गरीब बच्चो के लिये नि:शुल्क सिलाई केम्प की वय्व्स्था।
  • गर्ग सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, पानीपत
    गरीब बच्चो के लिये नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा केवल GIIT पर
  • दीक्षा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी, पानीपत
    गरीब बच्चो के लिये नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा एवं नि:शुल्क सिलाई केम्प की वय्व्स्था।

पानीपत के प्रमुख पर्यटन स्थल –

पानीपत का भारत के इतिहास में बहुत महत्व है, यहाँ अनेक एटिहासिक और दार्शनिक स्थल है | पानीपत के मुख्य पर्यटन पानीपत संग्रहालय, काबुली बाग, इब्राहिम लोदी का मकबरा, देवी मंदिर, काला अंब, बू-अली शाह का मकबरा, श्री राम श्र्णम पानीपत, सलारगंज गेट आदि है|पानीपत के बारें में विस्तृत जानकारी

  • काबुली बाग – यह पानीपत के प्रथम युद्ध के बाद बाबर ने स्थापित किया था | इस बाग बाबर ने पानीपत की प्रथम लड़ाई में इब्राहिम लोदी पर विजय की यादगार में बनवाया था |
  • सलारगंज गेट – पानीपत नगर के मध्य स्थित यह त्रिपोलिया दरवाजा प्राचीन आबादी का प्रदेश द्वार है |प्राचीन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना कहलाने वाला यह दरवाजा नवाब सलारगंज के नाम से प्रसिद्ध है |
  • काला अम्ब (‘वॉर हीरोज मैमोरियल’) – सन 1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध अफगान सरदार अहमदशाह अब्दाली और मराठा सरदार सदाशिवराव भाऊ के मध्य हुआ था | युद्ध में मराठों की पराजय हुई | इस स्थान पर हरियाणा सरकार ने ‘वॉर हीरोज मैमोरियल’ विकसित किया | यहाँ संग्रहालय भी स्थापित किया गया है |
  • सिद्ध शिव शनिधाम – सिद्ध शिव शनिधाम श्र्द्धालुओं को धार्मिक एकता से रूबरू कराता है | आस- पास के क्षेत्रों में इस शनिधाम को दादा- पोता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है |
  • कबीर-उल-औलिया हजरत शेख जलालुद्दीन की दरगाह – शेख जलालुद्दीन पानीपत के प्रमुख सूफी संत हुए हैं |ये बू अली कलंदर के समकालीन थे |
  • बू – अली शाह कलंदर दरगाह – हरियाणा में चिश्ती संप्रदाय की स्थापना शेख फरीद (फरीद्दीन शंकरगंज) ने की थी | बू-अलिशाह कलंदर भी चिश्ती संप्रदाय के प्रमुख सूफी संत थे | पानीपत में स्थित बू-अली शाह कलंदर की दरगाह शिल्प कला का उत्कृष्ट नमूना है |
  • सैयद रोशन अली शाह दरगाह – सैयद रोशन अली शाह साहेब की दरगाह भाईचारे की मिसाल है | यहाँ हर धर्म के लोग भाईचारे के लिए दुआ करने पहुँचते हैं |
  • इब्राहिम लोदी की कब्र – यह एतिहासिक मकबरा (इब्राहिम लोदी की कब्र) पानीपत के तहसील कार्यालय के निकट स्थित है | सन 1526 में इब्राहिम लोदी ने बाबर के साथ युद्ध किया था जिसमें उसकी पराजय हुई और वह मारा गया | युद्ध स्थल पर ही इब्राहिम लोदी को दफनाया गया था |
  • अल्ताफ हुसैन हाली की कब्र – अल्ताफ हुसैन हाली उर्दू, फारसी, अंग्रेजी व अरबी के अचे ज्ञाता थे | इन्होंने शिक्षा के प्रसार के लिए कई हजार रुपए इकट्ठे करके एक पुस्तकालय बनवाया और बाद में एक छोटा सा स्कूल शुरू करने में जुट गए जो बाद में हाली हाई स्कूल के नाम से प्रसिद्ध हुआ |
  • काबुली बाग मस्जिद – पानीपत के निकट काबुली बाग में एक मस्जिद तथा तालाब बना हुआ है |यह बाग बाबर ने पानीपत की प्रथम लड़ाई में विजय की खुशी तथा सबसे प्रिय रानी मुसम्म्त काबुली बेगम की याद में बनवाया था |पानीपत के बारें में विस्तृत जानकारी
  • हजरत ख्वाजा शंशुडीन का मकबरा – ये पानीपत के प्रमुख संत हुए हैं; जो बू- अली कलंदर के समकालीन थे और शेख अलिउडीन शाबरी के अनुयायी थे |
  • जामा मस्जिद – नगर की मुखी मस्जिद को जामा मस्जिद कहते हैं | यह नगर के मध्य में और नगर की सबसे बड़ी मस्जिद है |
  • सलार फखृडीन व हाफ़िज़ जमाला का मकबरा : यह मकबरा बू- अली कलंदर के माता- पिता का है |
  • कोस, कोहांड, मीनार – शेरशाह सूरी ने महामार्ग (एतिहासिक जी टी रोड) का निर्माण करवाया था उसने जनता की सुविधा के लिए मार्ग के प्रत्येक कोस पर एक- एक मीनार खड़ी करवाई थी |
  • मुकर्रब खान का मकबरा – मुकर्रब खान का वास्तविक नाम शेख हसन था मुकर्रब खान जहाँगीर के समय के प्रसिद्ध हकीम थे |
  • स्काई लार्क – यह पानीपत नगर में जी टी रोड पर स्थित है | इसे हरियाणा टूरिज़्म विभाग द्वारा संचालित किया जाता है और इस रेस्टोरेन्ट में सभी पर्यटन सुविधाएँ उपलब्ध है |
  • देवी तालाब शिव मंदिर – तृतीय युद्ध के पश्चात मराठा सरदार मंगल रघुनाथ ने पानीपत में देवी तालाब शिव मंदिर बनवाया |
  • ब्लू – जे – यह पानीपत से 18 किलोमीटर दूर समालखा नगर में ‘ब्लू- जे’ नामक पर्यटन स्थल है |

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