भिवानी के बारें में विस्तृत जानकारी

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22 दिसंबर 1972 को भिवानी, हिसार से अलग हो कर हरियाणा के नए जिले के रूप में उभरकर सामने आया | गंगा सतलुज के मैदान में बसा होने के कारण यह थार मरुस्थल को छूता है | यह हरियाणा में कांशी के रूप में जाना जाता है | हरियाणा शिक्षा बोर्ड का मुख्यालय भी भिवानी में स्थित है | यह प्रदेश अपने ऐतिहासिक तथा धार्मिक दृष्टव्य स्थलों के लिए प्रसिद्द है। इसके अलावा, भिवानी नगर शिक्षा, चिकित्सा एवं खेल कूद के लिए भी जाना जाता है। भिवानी हरियाणा के तीन मुख्यमंत्रियों की जन्मस्थली रह चुका है, चौ॰ बंसी लाल, बाबू गुप्ता एवं हुकुम चंद। भिवानी के उत्तर में हिसार, पूर्व में रोहतक, दक्षिण में महेंद्रगढ़, दक्षिण पूर्व में रेवाड़ी तथा पशिम और दक्षिण पश्चिम में राजस्थान है। ये हरियाणा के सबसे नीचे जल स्तर के जिलों में आता है। खासकर लोहारू और चरखी दादरी की ओर पानी की अत्यधिक कमी है।

क्षेत्रफल 4778 वर्ग किलोमीटर
स्थापना 22 दिसंबर 1972
मुख्यालय भिवानी
घनत्व 341
जनसंख्या 1634445 (2011)
लिंग अनुपात 886
विकास दर 14.70%
साक्षारता 75.21%
प्रमुख बोली जाने वाली भाषाए हिन्दी, हरियाणवी, बांगर
ब्लॉक भिवानी, बवानी खेरा, चरखी दादरी -1, चरखी दादरी-2, बधरा, लोहारु, बहल, कैरू, सिवानी, तोशाम
गाँव 444
तहसीले तोशाम, भिवानी , सिवानी, बवानीखेरा, लोहारु, बाधरा
लोकसभा क्षेत्र हिसार, महेन्द्रगढ़-भिवानी
विधानसभा क्षेत्र भद्रा, बवानी खेरा, भिवानी, दादरी, लोहारु, तोशम

 

इतिहास –

पुराने समय में भिवानी को अनेक नाम जैसे कि भानीग्राम, भिआनी, भियानी, भिवाणी आदि के नाम से जाना जाता था, लेकिन वर्तमान में यह बदल कर भिवानी बन गया।
आईने अकबरी में भिवानी जिले का वर्णन भी मिलता है। हिसार जिले के गजेटियर में भिवानी को प्राचीन काल से व्यापार का सुप्रसिद्ध केंद्र बताया गया है। बीकानेर रेलवे लाइन से जुड़े होने के कारण पहले भिवानी शहर राजपूताने का मुख्य व्यापारिक केंद्र माना जाता था। अमृतसर के पश्चात यह कपड़े की सबसे बड़ी मंडी था। इस कस्बे को हरियाणा की काशी भी कहा जाता है।
1714 तक भिवानी में पंचायती राज था और दिल्ली के बादशाहों के अधीन था तथा नाम मात्र का ही लगान दिया जाता था। दिल्ली तख्त के बादशाह के प्रतीनिधि सेठ सीताराम, भिवानी आए और उन्होंने बताया कि बादशाह ने एक लाख रूपय लगान के रूप में मंगवाए हैं इस पर दानवीर सेठ श्रीराम ने 75 हजार रूपय व भिवानी की जनता ने 25 हजार रूपय दिए तब जाकर भिवानी की रक्षा हो पाई।

अंग्रेजों द्वारा गौ हत्या पर प्रतिबंध – मेरठ में पहली बार अंग्रेजो के खिलाफ 1857 में क्रांति हुई थी। उस समय सेठ नंदराम ने हिसार और रोहतक के अंग्रेजों को अपने कटले में छिपाकर क्रांतिकारियों के द्वारा मौत के घाट उतारने से बचा लिया था। तब अंग्रेजों ने खुश होकर नगर सेट लाल नंदराम की मांग के अनुसार किसी भी पशु और पक्षी का शिकार करना और गौहत्या पर सदा सदा के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।

सन 1928 के बारदोली सत्याग्रह में भिवानी के बहुत से नौजवान जेल गए थे। इनमें प्रमुख रूप से पंडित नेकीराम शर्मा, पंडित उमादत्त शर्मा, पंडित राम कुमार और सेठ गोकलचंद आर्य प्रमुख थे।

भिवानी में समय समय पर हुये नए विकास कार्य और योजनाए –

  1. सन 1893 में भिवानी में पहली बार नहर लाई गई थी।
  2. सन 1933 में भिवानी में वाटर वर्कस स्थापित किया गया था।
  3. सन 1935 में गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था पक्की नालियों के द्वारा की गई थी।
  4. सन 1881 में रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ था। यह रेल लाइन रेवाड़ी से बठिंडा के बीच चलाई गई थी।
  5. सन 1883 में यहां से रेल यात्रा प्रारंभ हो गई थी।
  6. सन 1992 में उग्रसेन के प्रयासों से भिवानी सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की स्थापना की गई थी।
  7. सन 1948 में यहां बड़ा डाकघर भी खोला गया था।
  8. सन 1948 में ही टेलीफोन ऑपरेटर की नियुक्ति की गई थी।
  9. सन 1957 में पंडित दीनदयाल शर्मा के द्वारा श्री सनातन धर्म संस्कृत पाठशाला की स्थापना की गई थी।
  10. सन 1968 में पंडित सीताराम शास्त्री द्वारा ब्रह्मचार्य आश्रम की स्थापना की गई थी।

 शिक्षा –

शिक्षा के मामले में भिवानी बहुत उन्नत शहर है। यहाँ हरियाणा शिक्षा बोर्ड का मुख्यालय स्थापित है। इसके अलावा भिवानी में लगभग दस प्रौद्योगिकी संस्थान है जिनमें से Technological Institute of Textiles and Sciences तो पूरे उत्तर भारत में अपने जैसा अकेला है। तत्पश्चात यहाँ के अनेक और महाविद्यालय भिवानी की महिमा बढा रहे हैं। यहाँ के अधिकतर महाविद्यालय महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से संलग्न हैं। शहर के प्रमुख विद्यालयों में हलवासिया विद्या विहार, उत्तमी बाई, भिवानी पब्लिक स्कूल, वैश्य मॉडल, वैश्य सीनिअर, बाल भवन और डी॰ए॰वी॰ स्कूल उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा, दादरी के डी॰आर॰के॰, आर॰ई॰डी॰ और एपीजे तथा बहल के बी॰आर॰सी॰एम॰ भी प्रसिद्द हैं।

कम जनसंख्या होने के बावजूद हर वर्ष भिवानी में से अनेकों विद्यार्थी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धिक परीक्षाओं में उच्च श्रेणी से चयनित होते हैं, जैसे IIT, NDA, AIT, AIPMT, NIT, HPMT, ICS, HCS आदि।

देश का विख्यात औद्योगिक महाविद्यालय, BITS पिलानी (राजस्थान) भिवानी से अधिक दूरी पर नहीं है तथा वहाँ अनेक विद्यालय शैक्षिक भ्रमण पर अपने छात्रों को ले जाते हैं।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड – हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की स्थापना 31 जनवरी,1970 को चंडीगढ़ में हुई थी उसके बाद यह बोर्ड नवंबर सन 1980 में भिवानी में स्थानांतरित कर दिया गया था।इस बोर्ड के प्रथम अध्यक्ष बी.एस.आहूजा तथा प्रथम सचिव विश्वनाथ रहे थे।

उद्योग और व्यापार –
यह एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी है, जिसका अधिकांश व्यापार राजस्थान राज्य के साथ होता है। कपास की ओटाई एवं धुनाई, तेल की मिलें एवं निर्माण की लघु इकाईयां यहाँ के प्रमुख उद्योग हैं। भिवानी की 2 प्राचीन मिलें टी.आई.टी और पंजाब क्लोथ मिल सारे देश में प्रसिद्ध है। नायलोन निवार तथा धागे के निर्माण में भी भिवानी उत्कृष्ट भूमिका निभाता है।

भिवानी के प्रमुख उद्योग –

  • बिडला टेक्सटाइल मिल्स
  • चुनार शूटिंग शर्टिंग लिमिटेड
  • हिंदुस्तान गम एवं केमिकल्स लिमिटेड

यातायात और परिवहन –

भिवानी अपने यातायात के ज़रिये आस-पास के क्षेत्र से काफ़ी जुड़ा हुआ है। भिवानी से मुख्यतः पाँच तरफ सड़कें निकलती हैं, हिसार, तोशाम, लोहारू, चरखी दादरी और रोहतक। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए लगभग हर समय सड़क और रेल यातायात उपलब्ध है।

भिवानी एक बड़ा रेल-जंक्शन है और यहाँ से तीन दिशाओं में रेलवे लाइन निकलती हैं जिनमें से एक उत्तर की ओर जाती हुयी पंजाब चली जाती है। यहाँ किसी समय पर एक हवाई अड्डा भी बनाया गया था जो आज कल बंद है।

कृषि और खनिज प्रमुख नदियां –

भिवानी में सिचाई कि सुविधाए कम है, कोई बड़ी नदी भिवानी या आस पास के इलाके से नहीं गुजरती है , यहाँ मोसमी नहरे है और जमीन का जल स्तर भी काफ़ी नीचे है | यहाँ विशेष रूप से कम पानी वाली फसलों कि पैदावार कि जाती है जैसे चना, सरसों, मूंग, बाजरा, डाले, कपास, कुछ इलाको में गेंहू कि भी अच्छी पैदावार कि जाती है |

धर्म और लोग –

भिवानी की अधिकांश जनसंख्या हिन्दू धर्म का अनुसरण करती है। इनमें से भी अधिकतर जाट सम्प्रदाय के लोग है। तत्पश्चात राजपूत, खाती बनिए, ब्रह्मण आदि जातियां भी भिवानी में प्रमुख है। मुस्लिम लोगों की जनसंख्या तुलनात्मक रूप से कम है परन्तु नगण्य नहीं है। विविधता होने के बावजूद यहाँ कभी धर्म अथवा जाती को लेकर कोई ख़ास मतभेद नहीं हुआ है। अपितु लोग समभाव एवं भाईचारे का प्रतीक चिह्न हैं। भिवानी की कार्यालयी भाषा हिंदी है तथा बोली हरियाणवी है। कुछ लोग यहाँ शुद्ध हिंदी भी बोलते हैं और कहीं कहीं उर्दू का भी प्रभाव देखने को मिलता है। भिवानी में एक बड़ी जनसंख्या में बिहार तथा उत्तर प्रदेश से लोगों का आप्रवासन होता है जो रोज़गार के लिए यहाँ आते हैं। भिवानी का सामान्य पहनावा पुरुषों में कुर्ता-पजामा, धोती, पैंट-शर्ट, तथा सर पर खंडूवा है। स्त्रियाँ कमीज़, दामन, सूट, सलवार, तथा कुर्ती पहनती हैं। विवाह के अवसर पर सामान्यतः बड़े बुजुर्ग पारंपरिक पहनावे में आते हैं। समय के साथ भिवानी में भी हरियाणा के अन्यत्र स्थानों की भांति पाश्चात्य पहनावा प्रचलित होता जा रहा है। जैसे पुरुषों में जींस आदि तथा स्त्रियों में टॉप आदि।

भिवानी के लोग अत्यधिक धार्मिक होते हैं तथा कुछ हद तक कट्टरपंथी हिंदुत्व का अनुसरण करते हैं। अधिकांश राजपूत तथा जाट घरों में आज भी मांसाहार को त्यज समझा जाता है तथा सुध्ह एवं सात्विक जीवन बिताया जाता है।

खेल –

भिवानी ने देश को बहुत खिलाड़ी दिए है , यहाँ खेलो का बहुत महत्व है | 2008 में भिवानी बोक्सिंग के लिए प्रकाश में आया था जब इसके चार खिलाड़ियों ने ओलिम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और मेडल भी जीते। स्व॰ कप्तान हवा सिंह की याद में बनाया गया बोक्सिंग ट्रेनिंग सेंटर देश को अच्छे खिलाडी प्रदान कर रहा है। इसके अलावा SAI (Sports Authority of India) का छात्रावास भिवानी में ही स्थित है। भिवानी का बहु-उद्देश्यीय खेल परिसर “भीम स्टेडियम” भी विख्यात है जिसमें तैराकी, क्रिकेट, फूटबाल, बास्केटबाल, वोलीबाल, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, आदि हर प्रकार के भीतरी और बाहरी खेलों के उपकरणों से लैस सुविधायें युवाओं को उपलब्ध करायी जाती हैं। अपने बॉक्सर खिलाड़ियों की अधिकता की वजह से भिवानी को छोटा क्यूबा भी कहा जाता है।

मुख्य खिलाड़ी – गीता फ़ौगात, बबीता फ़ौगात, विजेंदर बॉक्सर आदि भिवानी से संबंध रखते है |

पर्यटन स्थल –

भिवानी को मंदिरों का नगर और भारत की छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ मंदिरों की अधिकता बहुत ज्यादा है। इनमें से शहर के बीचो-बीच स्थापित घंटाघर का मंदिर और नज़दीक के गाँव देवसर का मंदिर बहुत प्रसिद्द हैं।

तोशाम
बाबा मुंगीपा धाम – तोशाम की पहाड़ी पर बना बाबा मुंगीपा धाम बेहद दर्शनीय स्थल है। मान्यता है कि बाबा गोपीनाथ अपनी बहन चंद्रावल, मामा भृथरी और गुरु गोरखनाथ के साथ तोशाम की पाहाडी पर आए थे। चंद्रावल मूंगे रंग के वस्त्र धारण करती थी इसलिए इस क्षेत्र के निवासी उन्हें मुंगी मां कहते थे। मुंगी मां के ब्रह्मलीन हो जाने के बाद उनका नाम समय बीतने के साथ-साथ मुंगीपा हो गया और उनकी मंडी यहां पर बना दी गई।

तोशाम की बारादरी – भिवानी जिले में तोशाम नामक पहाड़ी पर बरादरी स्थित है। इसे पृथ्वीराज चौहान के किले के नाम से भी जाना जाता है |  इस बरादरी के निर्माण में चुने और छोटी ईंटो का प्रयोग किया गया है। इसमें 12 द्वारों का निर्माण ईस प्रकार से किया गया है कि केंद्रीय कक्ष में बैठा हुआ व्यक्ति चारों तरफ आसानी से देख सकता है।

अष्ट कुंड एवं पंचतीर्थ – तोशाम की ऐतिहासिक पहाड़ी पर पानी के 8 कुंडों में एक पंचतीर्थ है। जिसे पांडव तीर्थ भी कहा जाता है। बताया जाता है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे तो 13 दिन इसी स्थान पर रहे थे। यहां मुख्य पहाड़ी पर जगह-जगह कई कुंड बनाए गए थे, जो कि यहां रहने वाली भिक्षुओं और बाद में तपस्वियों को पीने के लिए पानी प्रदान करते थे।

रंगीशाह मस्जिद – रंगीशाह वाली मस्जिद वास्तुकला के हिसाब से एक दर्शनीय मस्जिद कही जाती है। ईस मस्जिद को छोटी मस्जिद, व्यापारियों वाली मस्जिद और नई मस्जिद के नाम से भी जाना जाता था। ईस मस्जिद में मसाईयों वाली मस्जिद के द्वार काष्ठकला के हिसाब से उत्कृष्ट कहे जा सकते हैं।

सिवानी –
बादशाह अकबर के समय दिल्ली सुबे में 8 सरकारें थी। जिनमें हिसार-ए-फिरोजा एक सरकार थी। जिसके तहत 27 महल आते थे। जिसमें सिवानी एक मुख्य परगना था। यह गांव हिसार से 32 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। सिवानी को मंडी के नाम से भी जाना जाता है।

भिवानी के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल
शीतला माता मेला, धनाना – धनाना मे प्रति वर्ष चैत्र मास की सप्तमी को शीतला माता (मोटी माता) का मेला लगता है।

देवी मेला, देवसर – भिवानी नगर से 5 किलोमीटर दूर ग्राम देवसर में प्रतिवर्ष चेत्र तथा अश्विन में दो बार देवी का मेला लगता है।

गौरी शंकर मंदिर – भिवानी का गौरी शंकर मंदिर अपने रुप व वैभव के लिए काफी प्रसिद्ध है। गौरी शंकर मंदिर भिवानी शहर के बीचो-बीच स्थित है। जिसे किरोड़ीमल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। क्योकि इस मंदिर का निर्माण भिवानी के सेठ किरोड़ीमल ने ही करवाया था।

परमहंस मंदिर, तिगड़ाना – भिवानी जिले के गांव तिगड़ाना में स्थित बाबा परमहंस के तीन मंदिर स्थित है। बाबा परमहंस ने गांव तिगड़ाना में डेरा डाला था

भूतों का मंदिर – यह मंदिर सन 1919 में भूत वंश के सेठों द्वारा मल्लू वाले तलाब पर स्थापित किया गया था।

पंचमुखी हनुमान मंदिर – पतराम दरवाजे के बाहर बैरागी साधुओं के द्वारा यह मंदिर स्थापित किया गया था।

बैया पर्यटक केंद्र – भिवानी नगर में पर्यटन विभाग के द्वारा लोक निर्माण विश्रामगृह के साथ बैया नाम से एक होटल तथा रेस्टोरेंट यहां पर स्थापित किया गया है।

लोहाण – लोहाण को पहले रियासत का दर्जा प्राप्त था। इसमें 75 गांव लगते थे। यह कस्बा पहले बावन के नाम से प्रसिद्ध था।

रेड रोबिन – पर्यटक विभाग के द्वारा भिवानी जिले में लोक निर्माण विभाग के द्वारा रेड रोबिन नाम से एक होटल तथा रेस्टोरेंट भी स्थापित किया गया है।

रोहनात का कुआं – यह गांव हंसी के निकट स्थित है, किंतु भिवानी जिले में ही स्थित है। रोहनात गांव में पहले बूरा गोत्र के जाट रहते थे, जिन्होंने सन 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध जबरदस्त विद्रोह किया था। यह गांव शहीद गांव के नाम से जाना जाता है। इस गांव पर अंग्रेजों द्वारा तोपें चलाई गई थी। तब लगभग 20-21 औरतों ने अपने बच्चों सहित इस कुएं में छलांग लगा दी थी। रोहनात गांव का यह कुआं आज भी इस जुल्म की याद दिलाता है।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल –

जाहरवीर गोगा पीर मंदिर, गुडाना कला, पीर मुबारक शाह दरगाह, भिवानी , लोहड पीर मजार, मंदिर सेठ तूहीराम हरनाम दास, श्री राम प्रभु मंदिर, श्री रंगनाथ मंदिर, आलमालों का मंदिर

भिवानी के प्रसिद्ध व्यक्ति –

  • बंसीलाल (पूर्व रक्षा मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा)
  • सेठ किरोड़ीमल (समाजसेवी)
  • बनारसीदास गुप्त (पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा)
  • रणबीर सिंह महेंद्रा (पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष)

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